ओवरथिंकिंग, एंग्ज़ाइटी और मैं: अपने अंदर की दुनिया
परिचय :- मैं एक "ओवरथिंकर" हूं। कभी-कभी मेरा दिमाग इतना चलता रहता है, मैं इतना ज्यादा सोचने लगती हूं कि खुद को रोकना मुश्किल हो जाता है या इसी वजह से कभी "एंग्जायटी अटैक" या "डिप्रेशन" तक के पल आ जाता है। लगता है मानो पूरी दुनिया मेरे खिलाफ खड़ी है या मैं अकेली पूरी दुनिया से लड़ रही हूं। कैसा लगता है:- हर छोटी-छोटी बात भी दिल पर लग जाती है हर छोटी-छोटी बात को दिल में लेकर बैठ जाना पूरा टाइम वही बात सोचते रहना ये सब अब आम अनुभव बन चुके हैं मेरे। मन और दिल दोनों अब थक चुके हैं पर फिर भी रुकना नामुमकिन सा लगता है। ट्रिगर्स, समझ और खुद से जूझना:- मेरे लिए ये महसूस करना जरूरी था कि किन चीज़ों से मेरी चिंता बढ़ती है। कभी पुराने अनुभव, कभी लोग, बार बार बीती बातों को मन मे दोहराना और कभी सिर्फ़ खुद के सोचने के तरीके – ये सब मुझे प्रभावित करते हैं। धीरे-धीरे मैंने सीखा कि खुद को समझना और अपने भावनाओं को पहचानना बहुत ज़रूरी है।,क्योंकि जब तक हम खुद को समझेंगे नहीं, हम ये नहीं जान पाएंगे कि क्या हमारे लिए सही है और क्या हमें परेशान करता है। अक्सर खुद को संभाल...